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هنا منْ روضةِ
الشامِ الجميلهْ
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ومن بردى،
وأزهارِ الخميلهْ
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ومن أطيابِ
ربوتها سأهدي
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وشاحاً لن ترى
عينٌ مثيله
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ومن نسماتِ
غوطتها عبيراً
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ومن أشجارها
الخضرا جديله
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سأهديها لِمنْ
صاغ القوافي
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وزيّن بالرؤى
الجذلى سبيله
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"وليدٌ"
يا رفيق الحرف هيّا
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وكنْ يا صاح في
قلبي نزيله
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عشيقتك التي
أَهْدَيْتَنِيَها
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تُوَشحُّ سِحَر
أسطرها الفضيله
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أبا بشار شعركَ
في ائتلاقٍ
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ترشُّ الطيبَ
أحرفُكَ البليله
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فعشْ كالنسرِ
مُفتخراً بأرضٍ
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تَظَلُّ بطبعها
أبداً أصيله
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وكنْ سيفاً لمنْ
والاكَ حباً
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وكنْ للضائعِ
الشاكي دليله
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"حماة"
عريقة المجد المصفّى
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عَرِينٌ أنتَ لنْ
ترضى بديله
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