|
|
مالاح لي
منك وجه ناصع وبدا
|
|
إلا تمليت
من سيمائه الرغدا
|
|
|
|
ولا خطرت
أمام العين عابرة
|
|
إلا تمنيت
أن أبقى إليك فدا
|
|
|
|
يا غادة جاد
باريها وأبدعها
|
|
للعين أنساً
وللألباب بلّ صدى
|
|
|
|
ماذا أغنيك
من شعري وقد سلبت
|
|
آيات حسنك
مني الوعي والرشدا
|
|
|
|
أما هناك
حدود للحنان وهل
|
|
للحب عند
حنان الأمهات مدى
|
|
|
|
بنيّتي يا
ندى يا من لعزّتها
|
|
أحب كل فتاة
سُميّت بندى
|
|
|
|
تدللي
مااشتهى منك الدلال فما
|
|
أحلى
الجمالين منك الدل والغيدا
|
|
|
|
واستأثري
بالحنان الخصب من كبدي
|
|
فأنت آخر
عنقودي هوىً وهدى
|
|
|
|
أحلى أماني
أن ألقاك باسمة
|
|
لاتعرفين
بهذا العالم الكمدا
|
|
|
|
ولا تعيشين
إلا خير ناعمة
|
|
بما النبيل
حوى والخامل افتقدا
|
|
|
|
بنيّتي أحمد
الأيام أوفرها
|
|
للنفس خيراً
وللآمال مستندا
|
|
|
|
يكفيك ستة
أشبال لك احتضنت
|
|
ولبوتان،
وأم تملأ البلدا
|
|
|
|
وحسب قلبي
أن الله نوّلني
|
|
أغلى أماني
الحياة المال والولدا
|
|
|
|
|